जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने किया जिला कारागार का वर्चुअल निरीक्षण

(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

पलियाकलां (खीरी )लखीमपुर 10 जून 2021। उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशानुसार व माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लखीमपुर खीरी मुकेश मिश्रा के संरक्षण व अनुमति से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में गुरुवार को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अविनाश चंद्र गौतम ने जिला कारागार लखीमपुर खीरी का वर्चुअल निरीक्षण किया। उक्त आशय की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लखीमपुर खीरी के सचिव अविनाश चंद्र गौतम ने दी।

सचिव ने बंदियों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। जेलर पंकज सिंह ने बताया कि जिला कारागार की क्षमता 725 है, जिसके सापेक्ष वर्तमान में 1725 बंदी निरुद्ध है। जिसमें से 1665 पुरुष बंदी, 60 महिला बंदी तथा महिला बंदियों के साथ 10 बच्चे विरुद्ध हैं। सचिव ने जेल पी.एल.वी. को मा. हाई पावर कमेटी के निर्देशों के अनुपालन हेतु सक्रिय योगदान करने के साथ ही सभी बंदियों को समय-समय पर आवश्यक विधिक सेवा प्रदान करने हेतु निर्देशित किया। जिला कारागार के जेलर ने अवगत कराया कि जेल में बनी बैंरकों का प्रतिदिन दिन में तीन बार सैनिटाइजेशन कराया जाता है। प्रत्येक बंदी को दो-दो मास्क दिए जाते हैं तथा कोई भी बंदी कोविड-19 पॉजिटिव नहीं है। जेल हॉस्पिटल में कुल बंदी 14 है। 45 वर्ष से ऊपर आयु के सभी बंधुओं का टीकाकरण हो चुका है। द्वितीय डोज 138 बंदियों को लगना शेष है। 18 वर्ष से ऊपर की आयु के बंदियों का वैक्सीनेशन 11 जून से प्रारंभ होगा। जेलर ने बताया कि जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों के बीच शारीरिक दूरी का पालन करते हुए मास्क व सैनिटाइजर का भी उपयोग कारागार में निरुद्ध बंदियों द्वारा किया जाता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लखीमपुर खीरी के सचिव अविनाश चंद्र गौतम ने बताया कि बंदियों को हाई पावर्ड कमेटी (एच.पी.सी.) द्वारा अंतरिम जमानत के संबंध में निर्देशों की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त सचिव ने बंदियों को जानकारी दी कि संशोधन अधिनियम 2/2006 द्वारा द०प्र०सं० मैं एक नया अध्याय 21ए धारा 265-ए से 265-एल तक प्ली बारगेनिंग ( सौदा अभिवाक) जोड़कर दंडित प्रकरणों को शीघ्रता से निपटाने हेतु प्रावधान किया गया। प्ली बारगेनिंग अवधारणा के अंतर्गत 07 वर्ष तक के दंड से दंडित अपराधों के संबंध में अभियुक्त, अभियोजन व पीड़ित पक्ष द्वारा आपसी सामंजस्य से प्रकरण के निपटारे हेतु न्यायालय में अनुमोदन से एक रास्ता निकाला जाता है, इसके अंतर्गत अभियुक्त कम सजा के बदले अपराध को स्वीकृत कर पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति देते हुए कठोर सजा से बच सकता है। सचिव द्वारा सभी बंदियों को मास्क व सैनिटाइजर उपयोग करने तथा स्वयं की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने हेतु कहा। बंदियों को कोविड-19 संबंधी सभी दिशा निर्देशों का पालन करने हेतु निर्देशित किया गया।

Spread the love

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published.