एसडीएम ने किया कस्तूरबा विद्यालय का निरीक्षण जानी हकीकत बालिकाओं को बांटे ज्यामेट्री  बॉक्स

(ओमप्रकाश ‘सुमन’)

    पलियाकलां खीरीलखीमपुर 13 मई। इन दिनों खीरी में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के सर्वांगीण विकास सहित शैक्षिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए डीएम महेंद्र बहादुर सिंह अभियान चला रहे है। सभी एसडीएम, बीडीओ, एबीएसए बा स्कूलों का भ्रमण कर विशेष प्रयास कर रहे, जिसका डीएम स्वयं नियमित अनुश्रवण व पर्यवेक्षण कर रहे।

डीएम के निर्देश पर शुक्रवार को करीब एक बजे उपजिलाधिकारी डॉ अमरेश कुमार मौर्य ने खंड शिक्षा अधिकारी रमेश चौधरी के साथ पलिया-निघासन रोड पर मरुआ पश्चिम स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां की न केवल मूलभूत आवश्यकताओं की पड़ताल की बल्कि शैक्षिक गुणवत्ता परखी। इस दौरान उन्होंने विद्यालय में नामांकित सभी बालिकाओं को ज्योमेट्री बॉक्स भेंट किए।

निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने शिक्षिकाओं को निर्देश दिया कि बालिकाओं को रचनात्मक व सुरुचिपूर्ण ढंग से पढ़ाया जाए। एसडीएम ने बालिकाओं सिर्फ कई प्रश्न करके उनकी शैक्षिक गुणवत्ता जांची। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की उपस्थिति स्टॉक सहित विभिन्न पंजिकाओ का अवलोकन करके संबंधित को जरूरी निर्देश दिए।

एसडीएम ने किया बालिकाओं से संवाद, किया मोटिवेट
एसडीएम डॉ अमरेश कुमार मौर्य ने कहा कि ऐसा नहीं कि आज आपने 6 घण्टे की पढ़ाई की और अगले दिन कुछ भी नहीं पढ़ा। आप जिस प्रकार खेल में मन लगता है वैसे ही पढ़ाई में मन लगाइये। फिर पढ़ाई भी खेल के समान लगेगी। उन्होंने बालिकाओं से मन भर पढऩे व खेलने के लिए भी कहा और कहा एक समय में एक ही काम करे और उसे शिद्दत से करे। मनुष्य का दिमाग एक मशीन है इसे जितना इस्तमाल करोगे यह उतना ही ज्यादा काम करता है। जो छात्राएं पढ़कर अपना लक्ष्य हासिल करना चाहती है। वे चुनौतियों में रास्ता तलाश लेती है और सफल होती है। हमारे आप पास संसाधन की कमी नहीं है बल्कि कमी है तो हमारे दृढ़ सकल्प में, हमारी इच्छा शक्ति में और हम अपने लक्ष्य के प्रति कितना समर्पण रखते है। किसी चीज को पाने के लिए पागलन होना चाहिए। आपके अन्दर ऐसी ललक हो कि उसे पाकर ही रहना है।

एमडीएम ने परखी भोजन की गुणवत्ता
एसडीएम अमरेश कुमार मौर्य ने खंड शिक्षा अधिकारी रमेश चौधरी के साथ निरीक्षण में बालिकाओं को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता परखी। निर्देश दिए कि बालिकाओं को गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन परोसा जाए। उन्होंने कहा कि बालिकाओं की सभी मूलभूत आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए।

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